सायन्तनी शोभा

वृक्ष-खण्ड के मध्य में
बहती कुल्या के
पतले प्रवाह में
बिछलाते हुए
निज प्रतिबिम्ब को
अस्त हो रहे अंशुमालि
अरण्यानी की ओट में ।

हरित जामुनी
सुगन्ध-मोहिनी
तरुवर-पंक्ति
पवन-प्रेरित हो कर
बिखरा जाती
सायन्तनी शोभा को ।

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