शिव-स्तुति

महादेव का कर पूजन
चल भोला की शरण
भक्ति-भाव से कर अर्चन
चल भोला की शरण ।

विषपायी सब सहते हैं
रत समाधि में रहते हैं
मन में जगाते हैं वैराग
शुभ संकल्प उठें अबाध
भरमाता नहीं पापी मन ।

चल भोला की शरण ।

शिव को भाती है जलधार
बेलपत्र ,चन्दन ,मंदार
भक्त करते हैं अभिषेक
आशुतोष वर देते अनेक
सकल मनोरथ सम्पूरण ।

चल भोला की शरण ।

विकट चौरासी का चक्कर
भव-भव में भटकता नर
मुक्ति देते हैं तत्काल
दयामय वे ज्वालभाल
छूट जाये आवागमन ।

चल भोला की शरण ।

द्वापर में जब हरि जन्में
जोगी वेश में शिव घूमें
दर्शन करने को आकुल
पहुँच गए सीधे गोकुल
कहते हुए अलख-निरंजन ।

चल भोला की शरण ।

यशोदा अपने लाल को लाड़े
अवलोक रही है आँखे फाड़े
उग्र जोगी द्वार पर आया एक
सर्प की माला को गले लपेट
हाथ में डमरु रूप डरावन ।

चल भोला की शरण ।

महादेव का कर पूजन
चल भोला की शरण
भक्ति-भाव से कर अर्चन
चल भोला की शरण ।

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