चरणचिह्न

राधा के रक्तिम पाद पद्म पावन
निज ह्रदय निलय में,न नीलघन
बसाते तुम नेह निष्ठां से यदुराय
तो भक्ति-प्रेम के आदर्श का अध्याय
अनखुला पूरा का पूरा रह जाता
सृष्टि का आधार अधूरा रह जाता
कृष्ण, तुम्हारा अवतार अधूरा रह जाता!

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