कलिका से

bud-t
तंद्रित नयन तो खोल लो पूरे अपने
कलिका ! बातें बाद में कर लेना तुम ।
खिल जब जायें रस-पंखुड़ियां तुम्हारी
कनबतियां भ्रमर से तब कर लेना तुम ।

कीट जुटेंगे शाख पर पाने को मधु-भोज
परिवेषण कोमल कर से कर देना तुम
रस-तृषातुर झुण्ड में भर कर आएंगीं
मैत्री भूरी ममाखियों से कर लेना तुम ।

गुलाबी बाहु बिम्ब पर जब आएं मँडराने
अंतस्तल तितली का तृप्त कर देना तुम
ले लो अलबेलि ! अलस अंगड़ाई आज
कल अरुण-अहोभाव व्यक्त कर देना तुम ।

← प्रियदर्शी अनुक्रमणिका अंतस्सागर →